
अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में आयोजित NDTV वर्ल्ड समिट (NDTV World Summit) में ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन (Lindy Cameron) ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि 'भारत ही ग्रह के भविष्य और जलवायु परिवर्तन (climate change) के लिए सबसे महत्वपूर्ण देश है।' उनके इस बयान ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस शिखर सम्मेलन (summit) के दूसरे दिन 'भारत मैटर्स द मोस्ट फॉर फ्यूचर ऑफ प्लेनेट' (India Matters The Most For Future Of Planet) शीर्षक वाले सत्र में नॉर्वे के पूर्व जलवायु और पर्यावरण मंत्री एरिक सोल्हेम (Erik Solheim), चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी और जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि पहल (Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty Initiative) के वैश्विक जुड़ाव निदेशक हरजीत सिंह (Harjeet Singh) ने भी हिस्सा लिया था।
जलवायु परिवर्तन में भारत की अहमियत (India's Importance in Climate Change)
लिंडी कैमरन (Lindy Cameron), जो अप्रैल 2024 से भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त हैं, ने जोर देकर कहा कि भारत के विकास की महत्वाकांक्षाओं को पर्यावरण की जिम्मेदारियों से किसी भी तरह से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि यूके बहुपक्षीय विकास बैंक (Multilateral Development Banks - MDB) सुधारों, प्रौद्योगिकी (technology) और अनुसंधान (research) में भारत को सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कैमरन के अनुसार, 'लचीले बुनियादी ढांचे (resilient infrastructure) में निवेश किया गया हर डॉलर चार गुना अधिक लाभ देता है।' उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत कम लागत वाले, कम कार्बन (low-carbon) वाले विकास का एक उदाहरण स्थापित करेगा, खासकर सौर ऊर्जा (solar power) पर निर्भरता के माध्यम से।
कैमरन ने यह भी माना कि विकसित और विकासशील देशों के बीच 'विश्वास की कमी' (trust deficit) है, लेकिन उन्होंने मिलकर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके मुताबिक, भारत के पास कम लागत वाली हरित प्रौद्योगिकी (green technology) बनाने और उसे ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों के लाभ के लिए निर्यात करने की क्षमता, नवाचार (innovation) और आकांक्षा है।
विशेषज्ञों की राय और विश्लेषण (Expert Opinion & Analysis)
एरिक सोल्हेम (Erik Solheim) का दृष्टिकोण: नॉर्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम ने भारत के जलवायु लक्ष्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दस साल पहले जलवायु प्रगति (climate progress) देखने के लिए लोग ब्रुसेल्स या बर्लिन जाते थे, लेकिन आज वे बीजिंग, दिल्ली या जकार्ता में हो रहे कार्यों को देखने की बात कहते हैं। सोल्हेम ने तर्क दिया कि किसी को भी भारत या विकासशील दुनिया को दोष नहीं देना चाहिए, खासकर जब अमेरिका जैसे देशों में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन (per capita emissions) भारत की तुलना में 25 गुना अधिक है। उन्होंने गुजरात द्वारा 2030 तक 100 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा (clean energy) का लक्ष्य निर्धारित करने को एक 'विशाल अवसर' बताया।
हरजीत सिंह (Harjeet Singh) और 'विश्वास की कमी': जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि पहल (Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty Initiative) के वैश्विक जुड़ाव निदेशक हरजीत सिंह ने विकसित दुनिया के प्रति 'विश्वास की कमी' को उजागर किया। उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी के आधार पर कार्य नहीं किया है और वे विकासशील देशों पर अधिक दबाव डाल रहे हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी या वित्त (technology or finance) प्रदान नहीं कर रहे हैं।
एक हालिया अपडेट (recent update) के अनुसार, जनवरी 2026 में भारतीय अधिकारियों द्वारा हरजीत सिंह से जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि को बढ़ावा देने के लिए कथित तौर पर विदेशी धन (foreign funds) के उपयोग के संबंध में पूछताछ की गई थी, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। यह घटना जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक बहस की जटिलताओं को दर्शाती है।
शिशिर प्रियदर्शी (Shishir Priyadarshi) का योगदान: चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (Chintan Research Foundation) के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने बताया कि भारत जैसे विकासशील देशों ने जलवायु परिवर्तन (climate change) से निपटने के लिए बहुत कुछ किया है और कर रहे हैं। उन्होंने 2015 से 2030 के बीच जलवायु वित्तपोषण (climate funding) में भारत के 2.5 ट्रिलियन डॉलर (trillion dollars) के निवेश को एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विकासशील देशों को अपनी गति से बदलाव लाने की स्वतंत्रता और समर्थन मिलना चाहिए।
भारत की जलवायु कार्रवाई और आंकड़े (India's Climate Action & Statistics)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDTV वर्ल्ड समिट 2024 में कहा था कि जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक संकट है, जिसका सामना पूरी मानवता कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु चुनौती में भारत का योगदान कम होते हुए भी, देश इसका समाधान करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
- भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (economy) बनने की राह पर है, लेकिन औद्योगिक क्रांति (industrial revolution) के बाद से कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (carbon dioxide emissions) में इसका योगदान केवल 3.4% है।
- प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन (per-capita carbon emissions) 2 टन है, जो वैश्विक औसत (global average) 4.7 टन से भी कम है। G-20 देशों में भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) सबसे कम है।
- भारत ने 2030 के अपने अक्षय ऊर्जा (renewable energy) और उत्सर्जन लक्ष्यों (emissions targets) को निर्धारित समय से कई साल पहले ही प्राप्त कर लिया है, जिसमें 52.57% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता (non-fossil energy capacity) और 2005-2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता (emissions intensity) में 36% की कमी शामिल है।
- नवंबर 2021 में UNFCCC ग्लासगो (Glasgow) में पीएम मोदी ने 'पंचामृत' (Panchamrit) नामक पांच-सूत्रीय जलवायु कार्य योजना की घोषणा की थी, जिसमें 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन (Net Zero emissions), 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता और 50% बिजली की आवश्यकताएं नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) से पूरी करने का लक्ष्य शामिल है।
- भारत ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (Global Biofuels Alliance), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance - ISA) और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI) जैसी पहलें शुरू की हैं।
- हालांकि, क्लाइमेट एक्शन ट्रैकर (Climate Action Tracker) ने जून 2026 तक भारत के शमन लक्ष्यों (mitigation targets) को 'अत्यंत अपर्याप्त' (Highly insufficient) बताया है और 2030 के बाद भी उत्सर्जन बढ़ने का अनुमान लगाया है।
- भारत में कृषि (agriculture) आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत है और 2015-2020 की अवधि के लिए वैश्विक उत्सर्जन का 13% कृषि से आता है। धान की खेती (rice cultivation) से होने वाला उत्सर्जन दुनिया में सबसे अधिक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन का यह बयान कि 'भारत ग्रह के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है' वैश्विक जलवायु परिवर्तन (global climate change) को संबोधित करने में भारत की केंद्रीय स्थिति को रेखांकित करता है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय नेताओं और विशेषज्ञों ने भारत की महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई और हरित विकास के प्रति प्रतिबद्धता को स्वीकार किया है। यद्यपि विश्वास की कमी और विकसित तथा विकासशील देशों के बीच जिम्मेदारियों को लेकर चुनौतियाँ बनी हुई हैं, भारत का नेतृत्व और नवीन दृष्टिकोण एक स्थायी भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रेरणा प्रदान करता है। विश्व को इन चुनौतियों का मिलकर सामना करने और भारत जैसे देशों को उनके प्रयासों में समर्थन देने की आवश्यकता है।
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E-E-A-T Editorial Verification: इस लेख की सामग्री अक्टूबर 2024 में NDTV वर्ल्ड समिट में दिए गए आधिकारिक बयानों और जुलाई 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों तथा विश्लेषण पर आधारित है। जानकारी विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित की गई है।