हिमाचल वेदर अलर्ट: मंडी हाईवे जलमग्न, जटौन बैराज (Jataun Barrage) के गेट खुले; 8 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट (Yellow Alert)

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में जारी मूसलाधार बारिश (heavy rainfall) ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजधानी शिमला समे...

हिमाचल वेदर अलर्ट: मंडी हाईवे जलमग्न, जटौन बैराज (Jataun Barrage) के गेट खुले; 8 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट (Yellow Alert)
फ़ाइल फोटो
हिमाचल वेदर अलर्ट: मंडी हाईवे जलमग्न, जटौन बैराज (Jataun Barrage) के गेट खुले; 8 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट (Yellow Alert)

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में जारी मूसलाधार बारिश (heavy rainfall) ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। राजधानी शिमला समेत कई जिलों में लगातार हो रही बरसात से नदी-नाले उफान पर हैं, जिससे भूस्खलन (landslides) और सड़क मार्ग बाधित होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। मंडी जिले में नेशनल हाईवे (National Highway) का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया है, जबकि सिरमौर में जटौन बैराज (Jataun Barrage) के गेट एहतियातन खोल दिए गए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने 8 अगस्त तक राज्य के कई हिस्सों के लिए भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी किया है, जिससे आगामी दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

मंडी में नेशनल हाईवे (National Highway) पर जलभराव और ट्रैफिक (Traffic)

आज (3 अगस्त, 2026) सुबह से हो रही लगातार बारिश के कारण मंडी जिले में नेशनल हाईवे-21 (National Highway-21) और नेशनल हाईवे-03 (National Highway-03) के कुछ प्रमुख हिस्से पानी में डूब गए हैं। मंडी शहर के पास कांगणी धार और अन्य निचले इलाकों में हाईवे पर करीब 2-3 फीट तक पानी भर गया, जिससे वाहनों की आवाजाही (vehicular movement) पूरी तरह ठप हो गई। रिपोर्ट्स (reports) के अनुसार, कई वाहन फंसे हुए देखे गए और यात्रियों को भारी परेशानी (heavy inconvenience) का सामना करना पड़ा। स्थानीय प्रशासन (local administration) ने ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों (alternative routes) पर डायवर्ट (divert) करने के प्रयास किए हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण राहत और बचाव कार्यों (relief and rescue operations) में बाधा आ रही है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (State Disaster Management Authority) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में मंडी जिले में औसतन 150 मिमी (millimeter) से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से काफी ज्यादा है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा (unnecessary travel) से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

जटौन बैराज (Jataun Barrage) के गेट खोले गए और अलर्ट

सिरमौर जिले में गिरी नदी (Giri River) पर स्थित जटौन बैराज (Jataun Barrage) के दो गेट (gates) आज सुबह खोल दिए गए हैं। बैराज में जलस्तर (water level) लगातार बढ़ने के कारण यह कदम उठाया गया है, ताकि निचले इलाकों में बाढ़ (flood) का खतरा कम किया जा सके। बैराज प्रबंधन (barrage management) ने नदी के किनारे रहने वाले लोगों और मछली पकड़ने वालों को सतर्क रहने की चेतावनी (warning) जारी की है। गिरी नदी में पानी छोड़े जाने से यमुना (Yamuna River) में भी जलस्तर बढ़ने की आशंका है, जिससे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग (IMD) का येलो अलर्ट और आगामी पूर्वानुमान (Forecast)

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के लिए 8 अगस्त तक 'येलो अलर्ट' (Yellow Alert) जारी रखा है। इस दौरान राज्य के मैदानी और मध्य पहाड़ी इलाकों (plains and mid-hills) में भारी से बहुत भारी बारिश (heavy to very heavy rainfall) होने की संभावना है, जबकि ऊपरी पहाड़ी इलाकों (upper hills) में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान (forecast) है। अलर्ट में बताया गया है कि:

  • संभावित प्रभाव: अचानक बाढ़ (flash floods), भूस्खलन (landslides), पेड़ गिरने (tree fall), सड़कों का अवरुद्ध होना (road blockages) और बिजली आपूर्ति में व्यवधान (power outages)।
  • प्रभावित जिले: मंडी, सिरमौर, कांगड़ा, कुल्लू, शिमला और चंबा विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
  • सार्वजनिक सलाह: लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने, नदी-नालों से दूर रहने और पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मॉनसून (Monsoon) की सक्रियता के कारण यह स्थिति बनी हुई है और अगले कुछ दिनों तक इसमें विशेष सुधार की उम्मीद नहीं है।

मुख्य बिंदु और विश्लेषण (Key Insights & Analysis)

हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे मॉनसून के दौरान भूस्खलन और बाढ़ के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। लगातार हो रही भारी बारिश न केवल सड़कों को बाधित करती है, बल्कि कृषि (agriculture) और स्थानीय अर्थव्यवस्था (local economy) को भी भारी नुकसान पहुंचाती है। राज्य सरकार (State Government) और आपदा प्रबंधन टीमों (Disaster Management Teams) को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति (emergency situation) से निपटा जा सके।

  • पर्यटकों के लिए चेतावनी: मॉनसून के इस चरम चरण में, पर्यटकों (tourists) को पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा (travel to hill areas) टालने की सलाह दी जाती है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव: लगातार बारिश से सड़कों, पुलों (bridges) और अन्य बुनियादी ढांचे (infrastructure) पर भारी दबाव पड़ रहा है, जिससे उनकी मरम्मत (repair) और रखरखाव (maintenance) एक बड़ी चुनौती बन गई है।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन (climate change) को ऐसी चरम मौसमी घटनाओं (extreme weather events) के बढ़ते पैटर्न का एक प्रमुख कारक मानते हैं।

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