हिमाचल प्रदेश: हमीरपुर में लंपी वायरस का कहर, 48 पशु संक्रमित और 4 की मौत; पशुपालक परेशान (Lumpy Skin Disease)

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) का प्रकोप एक बार फिर तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ताजा सरकारी...

हिमाचल प्रदेश: हमीरपुर में लंपी वायरस का कहर, 48 पशु संक्रमित और 4 की मौत; पशुपालक परेशान (Lumpy Skin Disease)
फ़ाइल फोटो
हिमाचल प्रदेश: हमीरपुर में लंपी वायरस का कहर, 48 पशु संक्रमित और 4 की मौत; पशुपालक परेशान (Lumpy Skin Disease)

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) का प्रकोप एक बार फिर तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में इस संक्रामक बीमारी के चलते पशुपालकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, हमीरपुर में लंपी वायरस के 8 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमित पशुओं (infected cattle) की संख्या बढ़कर 48 हो गई है। दुखद बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी के कारण अब तक चार पशुओं की मौत भी हो चुकी है।

हमीरपुर में लंपी वायरस का बढ़ता प्रकोप: आंकड़े और वर्तमान स्थिति (Lumpy Skin Disease Outbreak)

पशुपालन विभाग (Animal Husbandry Department) की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित पशुओं को अन्य स्वस्थ जानवरों से अलग रखने की सख्त हिदायत दी गई है, ताकि इस वायरस को फैलने से रोका जा सके।

विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में स्पेशल मेडिकल कैंप्स (special medical camps) लगाए जा रहे हैं। डॉक्टर लगातार बीमार पशुओं का इलाज कर रहे हैं और पशुपालकों को इस वायरस के बारे में जागरूक कर रहे हैं।

  • कुल संक्रमित मामले: हमीरपुर में अब तक 48 मामले दर्ज किए गए हैं।
  • हालिया नए मामले (New Cases): पिछले 24 घंटों में लंपी वायरस के 8 नए केस सामने आए हैं।
  • कुल मौतें (Total Deaths): संक्रमण के गंभीर लक्षणों के कारण अब तक 4 पशुओं की मृत्यु हो चुकी है।

लंपी वायरस के लक्षण और बचाव के उपाय (Lumpy Skin Disease Symptoms and Prevention)

लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी (viral disease) है जो मच्छरों, मक्खियों और जूं जैसे खून चूसने वाले कीड़ों के जरिए फैलती है। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने तबेले या गोशाला में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें।

बीमारी के प्रमुख लक्षणों (symptoms) में पशु के शरीर पर बड़ी-बड़ी गांठें बनना, तेज बुखार आना, आंखों और नाक से पानी बहना तथा दूध उत्पादन में भारी गिरावट आना शामिल है। यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत आइसोलेशन (isolation) में भेज देना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय और सरकारी प्रयास (Expert Opinion & Animal Husbandry Department Action)

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर वैक्सीनेशन (vaccination) और सावधानी ही इस बीमारी का एकमात्र ठोस इलाज है। सरकार द्वारा प्रभावित इलाकों में गोट पॉक्स वैक्सीन (Goat Pox Vaccine) का वितरण और टीकाकरण अभियान तेज कर दिया गया है।

पशु चिकित्सकों के अनुसार, बीमार पशुओं को पौष्टिक आहार देना चाहिए ताकि उनकी इम्यूनिटी (immunity) मजबूत बनी रहे। इसके अलावा, किसी भी मृत पशु के शव का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए ताकि संक्रमण आगे न फैले।

इस पूरी स्थिति और रिपोर्ट की अधिक जानकारी के लिए आप मूल खबर (Original News Source) पर जा सकते हैं।

पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। नवीनतम समाचार (Latest News Updates) के लिए हमारे ब्लॉग होमपेज पर विजिट करें।

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