यूरोप में हाहाकार: रिकॉर्डतोड़ गर्मी से फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन बेहाल, लाखों लोग प्रभावित

पश्चिमी यूरोप में झुलसा देने वाली गर्मी: वर्तमान स्थिति और भयावह प्रभाव पश्चिमी यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहाँ फ्रांस, ब्रिटे...

पश्चिमी यूरोप में झुलसा देने वाली गर्मी: वर्तमान स्थिति और भयावह प्रभाव

पश्चिमी यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहाँ फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन जैसे देश रिकॉर्ड तोड़ तापमान का सामना कर रहे हैं। लाखों लोग इस जानलेवा गर्मी से जूझ रहे हैं, जिसके चलते पूरे महाद्वीप में 'रेड हीट अलर्ट' जारी किए गए हैं। यह स्थिति न केवल दैनिक जीवन को बाधित कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

फ्रांस में, राष्ट्रीय औसत तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जो देश का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया है। नांतेस जैसे शहरों में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है और बुधवार को 96 मुख्यभूमि विभागों में से रिकॉर्ड 58 को रेड अलर्ट पर रखा गया था, जो गुरुवार को बढ़कर 72 विभागों तक पहुँचने की उम्मीद है। ब्रिटेन में भी मौसम विभाग ने दुर्लभ 'रेड अलर्ट' जारी किया है, जहाँ तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे जून महीने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूट सकता है। स्पेन के कई शहरों में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के निशान को पार कर गया है।

इस भीषण गर्मी के भयावह परिणाम सामने आ रहे हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों और नहरों में नहाने गए 40 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश युवा थे। फ्रांस में गर्म कारों में दम घुटने से बच्चों की मौत की खबरें भी आई हैं। बढ़ते तापमान के कारण 1,350 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है, और सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। फ्रांस में गोल्फेश न्यूक्लियर पावर प्लांट को भी बंद करना पड़ा क्योंकि प्लांट को ठंडा रखने के लिए आवश्यक नदी का पानी अत्यधिक गर्म हो गया था। परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है और पूरे महाद्वीप में बिजली कटौती (ब्लैकआउट) का खतरा मंडरा रहा है।

जलवायु परिवर्तन: एक बढ़ता और जानलेवा खतरा

वैज्ञानिकों का मानना है कि पश्चिमी यूरोप में लगातार बढ़ती और तीव्र होती ये हीटवेव जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम हैं। 'ओमेगा ब्लॉक' जैसी मौसमीय प्रणालियाँ, जहाँ गर्म हवा एक ढक्कन की तरह यूरोप के ऊपर फंस जाती है, इस संकट को और बढ़ा रही हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार, यूरोप दुनिया के औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। जो तापमान कभी असामान्य माने जाते थे, वे अब धीरे-धीरे नई सामान्य स्थिति बनते जा रहे हैं।

इन जानलेवा हीटवेव का स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। 'विश्व स्वास्थ्य संगठन यूरोपीय क्षेत्र' के अनुसार, गर्मी का तनाव जलवायु से संबंधित मौतों का एक प्रमुख कारण है। पिछले 20 वर्षों में गर्मी से संबंधित मृत्यु दर में 30% की वृद्धि हुई है। बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन के अनुसार, अकेले 2022 की यूरोपीय हीटवेव के दौरान 70,000 से अधिक लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था। आर्थिक रूप से भी, चरम मौसमी घटनाओं ने लाखों लोगों की आय को कम कर दिया है और गरीबी का खतरा बढ़ाया है, खासकर निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए। यूरोप के केवल 20 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनर हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा लगभग 90 प्रतिशत है, जिससे गर्मी का प्रभाव और भी गंभीर हो जाता है।

यह बदलता पैटर्न एक गंभीर चेतावनी है कि यदि ग्लोबल वार्मिंग पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में ऐसी जानलेवा हीटवेव नई सामान्य स्थिति बन सकती हैं। सरकारों और व्यक्तियों दोनों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और भविष्य के लिए अनुकूलन करने हेतु तत्काल कदम उठाने होंगे।

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